सामवेद मंत्र 990 में आचार्य के पास से शिष्य के ज्ञानग्रहण का विषय है। मंत्र निम्न है।
मंत्र का पदार्थ सामवेद भाष्यकार वेदमूर्ति आचार्य (डॉ०) रामनाथ वेदालंकार जी रचित:- शिष्य कह रहा है–मैं शिष्य विद्या के ऐश्वर्य से युक्त आचार्य से सात विभक्तियों तथा सम्बोधन इन आठ पदों से युक्त अर्थात् सुबन्तरूप, प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुषों के एकवचन, द्विवचन बहुवचन रूप नौ विभागों से युक्त अर्थात् तिडन्तरूप, सत्यज्ञान को बढ़ाने वाली, (विस्तृत) वाणी को ग्रहण करता हूं। अभिप्राय यह है कि सब सुबन्त और तिडन्त रूपों को जानकर सम्पूर्ण वांग्मय में पण्डित हो जाता हूं।
भावार्थ:- सब विद्यार्थियों को चाहिए कि व्याकरणशास्त्र को भलीभांति पढ़कर तथा अन्य वेदांगों में भी प्रवीण होकर, वेदार्थों को जानकर, विद्वान होकर अपने विद्यार्थियों को पढ़ाएं।
-प्रस्तुतकर्ता मनमोहन आर्य