Advertisement
Home Local News यूपी कांग्रेस के पूर्व महासचिव भानु सहाय ने लिखा प्रियंका गांधी को...

यूपी कांग्रेस के पूर्व महासचिव भानु सहाय ने लिखा प्रियंका गांधी को पत्र, मिलने का समय मांगा

0
491

– असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और छोटे राज्यों को लेकर जनांकाक्षाओं से अवगत कराया
– असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा अधिनियम -2००8 के प्रभावी न होने पर दुख जताया

नई दिल्ली/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव भानु सहाय ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी वाडरा को छोटे राज्यों के गठन व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से सम्बन्धित पत्र लिखा है। उन्होंने इस मुद्दों को लेकर चर्चा करने के लिए श्रीमति प्रियंका गांधी से समय की मांग करते हुए करते हुए एक प्रस्तुतिकरण देने को कहा है, ताकि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर जनाकांक्षाओं में खरा उतर सके और रणनीति में शामिल हो सके।

Advertisment

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी वाडरा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव ने पत्र लिखकर पार्टी की नीति निर्धारण पर बल दिया हैॅ। उन्होंने प्रियंका गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि भविष्य में पार्टी की समावेशी नीति में शामिल किए जाने की सार्वजनिक आकांक्षाओं के संबंध में आम लोगों और जमीनी स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सुझाव आमंत्रित करने के आपके अभियान के जवाब में यह पत्र है। मैं यहां दो प्रमुख मुद्दों को सूचीबद्ध कर रहा हूं, जिन्हें भविष्य की नीति, कार्यक्रम और पार्टी की रणनीति में जगह दी जा सकती है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि बुंदेलखंड के लोगों की आकांक्षाओं के लिए एक अलग छोटे राज्य के गठन के लिए यूपी और एमपी के 17+ जिले हैं। इसे लेकर जनाकांक्षा है। दूसरा मुद्दा असंगठित क्षेत्र से श्रमिकों से सम्बन्धित है। पत्र में कहा गया है कि असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा अधिनियम का उचित कार्यान्वयन और गोद लेना है। यूपी, एमपी और देश भर के अन्य राज्यों में 2००8 से लम्बित है। दोनों विषयों पर मेरी विनम्र प्रस्तुति इस प्रकार है कि यूपी में बुंदेलखंड राज्य, हरित प्रदेश (पश्चिमी यूपी) और पूर्वांचल राज्य (यूपी में पूर्व में) के गठन की लंबे समय से मांग है, इसी तरह बिहार में ‘मिथिला प्रदेश’ है, महाराष्ट्र में यह ’’विदर्भ राज्य’’ है; पश्चिम बंगाल में यह ’’गोरखालैंड’’ है, ‘बोडोलैंड’ आदि, जैसे छोटे राज्यों की नीति को शामिल कर सकते हैं। असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा अधिनियम -2००8 यूपीए-एक द्बारा तैयार किया गया था, लेकिन इसके गठन के 12 साल बाद भी कई राज्य सरकार ने इसे ठीक से लागू नहीं किया है। एक अनुमान के अनुसार, 42 करोड़ हैं, इस देश की कुल आबादी में से 28% वेयरर्स कहते हैं। इसमें कृषि मजदूर भी शामिल हैं, इसके बाद कोविद -19 महामारी इस अधिनियम लास ने बहुत महत्व प्राप्त किया। मनरेगा और कई अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अलावा, सामाजिक सुरक्षा एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है। यह अधिनियम इस असंगठित श्रमिकों के क्षेत्र में अपार मदद करेगा। हमने इसे लागू करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। दोनों मुद्दों के साथ राजनीतिक दुराचार हुआ है। कृपया हमें इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुति देने के लिए कुछ समय दें। ये दोनों मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं और निकट में महत्व प्राप्त करेंगे।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here