पावन चारधाम हैं मोक्ष के दाता

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jagran

बचपन से सुनता आ रहा हूं कि चार धाम की यात्रा कर लो, जीवन-मृत्यु के जंजाल से मुक्ति मिल जाएगी। याद है दादी-नानी की वे बातें, जब वे बताती थीं अपनी यात्राओं के बारे में। उनकी कही बातें मन में कब और कैसे बस गई थीं, पता ही नहीं चला था, उम्र बढ़ी लेकिन उन यात्राओं के बारे में दादी-नानी की कही गई बातों को भुला नहीं पाया और इनका महत्व भी बेहतर तरीके से समझ पाया। वैसे हमेशा से चार धाम यात्रा का हिंदू धर्म में विश्ोष महत्व रहा है। माना जाता है कि इन चार धाम यात्रा करने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है और उसे मोक्ष मिलता है। चार धाम वास्तव में भगवान के विभिन्न द्बार माने जाते हैं। ये चार धाम हैं- बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम और द्बारका। बद्रीनाथ देश के उत्तर में है तो पुरी पूर्व में, रामेश्वरम दक्षिण में और द्बारका पश्चिम में हैं। इन्हें ‘चार धाम’ की संज्ञा आदि शंकराचार्य ने दी थी।

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चार धाम एक वर्ग बनाता है, बद्रीनाथ और रामेश्वरम एक ही अक्षांश और द्बारका और पुरी एक ही देशांतर पर स्थित हैं। पुराणों मेें भी इन स्थानों का विश्ोष महत्व बताया गया है। आज भी हिंदुओं की आस्था इन तीर्थ यात्रा को लेकर बनी हुई है और हर वर्ष लाखों लोग यात्रा के लिए जाते हैं। यात्रा करने वालों में विश्ोष तौर उम्रदराज लोग होते हैं। इसके अलावा इन पवित्र तीर्थ नगरियों में लाखों साधू, सन्यासी और तपसी ईश्वरत्व की प्राप्ति के लिए समर्पित नजर आते हैं। खास बात यह है कि ये तीर्थ न सिर्फ देश के लोगों को आकर्षित करते हैं, बल्कि विदेशी भी हर साल यहां मन की शांति की प्राप्ति के लिए आते हैं।

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ धाम देश के पवित्रतम तीर्थो में से है। ये हिमालय में स्थित है। यह उत्तराखंड के बद्रीनाथ शहर में समुद्र तल से 3133 मीटर की उंचाई पर है। बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि उन्होंने इस पवित्र स्थान में तपस्या की थी। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को खुले में तपस्या करते देखा तो उन्हें विपरीत मौसम से बचाने के लिए बद्री वृृक्ष का रूप धर लिया। इसलिए मंदिर का नाम बद्री नारायण पड़ा। मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण गढ़वाल के राजाओं ने कराया था।

पुरी

जगन्नाथ का आशय है ब्रह्मांड का भगवान। जगन्नाथपुरी मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा की पूजा की जाती है। देवताओं की यह मूर्तियां लकड़ी से बनी हैं। हर बारह साल के बाद इन लकड़ी की मूर्तियों को पवित्र पेड़ों की लकड़ी के साथ समारोहपूर्वक बदला जाता है। हर समारोह में इन मूर्तियों की प्रतिकृति तैयार की जाती है। पुरी में हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है।

रामेश्वरम

रामेश्वरम मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। रामेश्वरम स्वामी मंदिर रामेश्वरम द्बीप पर स्थित है। श्रीलंका से लौटते समय भगवान राम ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी। माना जाता है कि रावण को मारने के बाद ब्राह्मण की हत्या के दोष से मुक्त होने के लिए श्री राम ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी और इसकी मूर्ति भगवान हनुमान कैलाश से लाए थे

द्बारका

द्बारका यानी भगवान श्री कृष्ण की नगरी, यह गुजरात के द्बारका में है। यह जगत मंदिर के तौर पर लोकप्रिय है। यह मंदिर भगवान कृृष्ण को समर्पित है, जिन्हें द्बारका का राजा भी माना जाता है। हिदू पुराणों के अनुसार इस मंदिर को भगवान कृष्ण के पौत्र वज्रनभ ने भगवान कृष्ण के निवास हरी गृृह में बनवाया था। माना जाता है कि इस मंदिर की यात्रा करने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए इसे मोक्षपुरी भी कहा जाता है। द्बारका एक बेहद खूबसूरत नगरी है, यहां कई प्रचीन मंदिर भी है, जो आज भी श्रद्धा का केंद्र बने हुए।

-भृगु नागर

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