इस मंत्र का जप करके लगाएं तिलक, पूजन में तिलक लगाना जरूरी

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वैसे तो आम तौर पर श्रद्धालू पूजन के समय तिलक जरूर धारण करते हैं, लेकिन आज के दौड़भाग के युग में बिना तिलक लगाए भी पूजा करने लगे है, जो कि किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्हंे ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह धर्म संगत नहीं है।

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यदि पूजा का पूर्णफल आप चाहते हैं तो तिलक आवश्य लगाना चाहिए, बिना तिलक लगाए पूजन करने से पूर्णफल की प्राप्ति सम्भव नहीं है, इसलिए धर्म शास्त्रों में तिलक के महत्व को महिमा मंडित किया गया है, इसलिए सभी श्रद्धालुओं को भावयुक्त होकर तिलक धारण करना चाहिए, इससे पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। तिलक लगाने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं। तिलक लगाकर भोजन ग्रहण करने को धर्म शास्त्रों में धर्म संगत बताया गया है। यही वजह है कि मंदिरों में तिलक लगाया जाता है, ताकि भक्त को उसके दर्शन का पूर्ण फल की प्राप्ति हो सके और वह उनकी कृपा मनोवांछित फल प्राप्त कर सके।


किसी देवी-देवता के मंत्र के जप को आरम्भ करने से पहले हवन पूजन के समय रोली या चंदन का तिलक आवश्य लगाना चाहिए। वैसे तो हिंदू धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि नित्य क्रिया से निवृत्त क्रिया से निवृत्त होकर स्नान के बाद तिलक लगाना चाहिए, इसके बाद देवी- देवताओं का पूजन करना चाहिए।

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इसके बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। बिना तिलक लगाए भोजन भी नहीं करना चाहिए। बिना तिलक लगाए भोजन करने को भी धर्म शास्त्रों ने निंदित माना है लेकिन आज के दौर में यदि इतना समय नहीं तो भी मंत्र जप करते समय आवश्य तिलक आवश्य लगाएं।
मंत्र है-
केशवानन्द गोविन्द वाराह पुरुषोत्तम।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु।।
कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।।

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