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रूस ने आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट की आलोचना की

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राजनीतिक पूर्वाग्रह करार दिया

मॉस्को, 23 मई (एजेंसी) रूस ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने को राजनीतिक पूर्वाग्रह एवं कानूनी रूप से अनुचित करार दिया है।


रूसी सुरक्षा परिषद के उप सचिव अलेक्जेंडर वेनेडिक्टोव ने न्यायालय पश्चिम देशों की कठपुतली बन गया है। The
रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक से बात करते हुए श्री वेनेडिक्टोव ने कहा, “हाल के वर्षों में, आईसीसी पूरी तरह से विकृत हो गया है और वह पश्चिमी देशों के हाथों की कठपुतली बन गया है। अपने नियंत्रकों के दबाव में आकार न्यायालय ने हमारे राष्ट्राध्यक्ष और कई अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का गैरकानूनी निर्णय लिया है।”

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उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों द्वारा की गई कानूनी समीक्षा में आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला है। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों द्वारा आईसीसी के फैसले की कानूनी समीक्षा में साक्ष्य का पूर्ण अभाव और प्रस्तुत आरोपों में विरोधाभास पाया है। ये वारंट अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक स्वीकृत मानदंडों का गंभीर उल्लंघन हैं।”


श्री वेनेडिक्टोव ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पर हमला तेज करते हुए आईसीसी की समग्र गतिविधियों की आलोचना की, इसकी वैधता और निष्पक्षता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यह आईसीसी की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय ठीक से लागू करने में स्पष्ट अक्षमता एवं संगठन के उच्च अधिकारियों द्वारा किए गए कई दुरुपयोगों एवं राजनीतिक पूर्वाग्रह को दर्शाता है।”


आईसीसी का मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है और इसकी स्थापना 2002 में रोम संविधि के अंतर्गत हुई थी। इसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सबसे गंभीर अपराधों, जिसमें युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं। जिसके लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया जाता है।


विश्व के 123 सदस्य देश वाले न्यायालय ने युद्ध के दौरान यूक्रेन से बच्चों के कथित अवैध निर्वासन का हवाला देते हुए राष्ट्रपति पुतिन और बच्चों की लोकपाल मारिया लवोवा-बेलोवा के खिलाफ 2023 में वारंट जारी किया था। रूस ने कहा कि बच्चों को उनकी सुरक्षा के लिए संघर्ष क्षेत्रों से निकाला गया था और आईसीसी के दावे निराधार हैं।

रूस ने 2000 में इस क़ानून पर हस्ताक्षर किया था, लेकिन न्यायालय के फ़ैसलों की आलोचना के बाद 2016 में इसने अपना हस्ताक्षर वापस ले लिया था। यूक्रेन युद्ध में आईसीसी की भागीदारी और रूसी अधिकारियों के खिलाफ़ इसके हालिया वारंट ने तनाव को और बढ़ा दिया है और न्यायालय की निष्पक्षता एवं अधिकार पर लंबे समय से चली आ रही बहस फिर से छिड़ गई है।

श्री वेनेडिक्टोव ने आईसीसी के रिकॉर्ड की भी आलोचना की, उन्होंने इसके 17 करोड़ डॉलर के वार्षिक बजट और लगभग 900 कर्मचारियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि दो दशक पहले इसकी स्थापना के बाद से अबतक केवल 40 गिरफ्तारी वारंट और 13 मामलों में दोष सिद्धि हुए हैं। उन्होंने कहा कि चीन, भारत, अमेरिका और रूस सहित प्रमुख वैश्विक शक्तियां रोम कानून के पक्षकार नहीं हैं, वह संधि जिसके द्वारा न्यायालय की स्थापना हुई।


उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय कानूनी सहयोग का राजनीतिकरण मुद्दे पर रूस में होने वाले आगामी सुरक्षा फोरम में चर्चा की जाएगी और इस क्षेत्र में, हमारे पास अपने विदेशी साझेदारों को देने के लिए भी कुछ है।”


रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव और वर्तमान में सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष ने भी आईसीसी की कार्रवाई को अव्यावहारिक और निराधार बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा “न्यायालय ने पुतिन सहित राष्ट्राध्यक्षों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करके मूर्खता की है और हेग के अधिकारी जानते हैं कि इन निर्णयों को व्यवहारिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता है।”

श्री मेदवेदेव ने इस बात पर भी बल दिया कि एक संप्रभु देश के प्रमुख के रूप में रूसी राष्ट्रपति को विदेशी आपराधिक क्षेत्राधिकार से पूर्ण छूट प्राप्त है। आईसीसी ने सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ वालेरी गेरासिमोव सहित अन्य रूसी अधिकारियों के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। रूस ने न्यायालय के इस कदम को सरासर निराधार करार दिया है।


उल्लेखनीय है कि सुरक्षा मुद्दों पर उच्च प्रतिनिधियों की 13वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक 27 से 29 मई तक रूस में होने वाली है, जिसकी अध्यक्षता सुरक्षा परिषद के सचिव शोइगु करेंगे।

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