‘मलेशिया लिंक’ के साथ हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाने के आरोप; धार्मिक दबाव और मुस्लिम कट्टरपंथी नेटवर्क की आशंका
सनातनजन विशेष संवाददाता, लखनऊ। महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस (TCS) से जुड़े विवादित मामले में एटीएस की जांच लगातार गहराती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में जांच एजेंसियों के सामने मलेशिया से जुड़े डिजिटल संकेत और विदेशी संपर्कों की आशंका सामने आने के बाद इस केस ने नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। अब यह मामला केवल कथित उत्पीड़न या आंतरिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें धार्मिक पहचान के आधार पर दबाव, मानसिक शोषण और संभावित ‘मुस्लिम कट्टरपंथी नेटवर्क’ के लिंक को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एटीएस जांच में कुछ ऐसे डिजिटल ट्रेल, चैट लॉग्स और ऑनलाइन संपर्कों के संकेत मिले हैं जिनका संबंध मलेशिया आधारित लोकेशन या सर्वर से जुड़ा बताया जा रहा है। एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह विदेशी कनेक्शन वास्तविक है या फिर किसी तकनीकी माध्यम से जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच शिकायतकर्ताओं और कुछ संगठनों की ओर से यह आरोप भी सामने आया है कि कंपनी से जुड़े घटनाक्रमों में कुछ कर्मचारियों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर मानसिक दबाव में लाने और निशाना बनाने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों पर वैचारिक प्रभाव डालने, धार्मिक विचारधारा थोपने और हिंदू कर्मचारियों को अलग-थलग करने जैसी गतिविधियां सामने आई हैं। इसी आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि यह विवाद केवल वर्कप्लेस प्रेशर नहीं बल्कि ‘आइडियोलॉजिकल’ और ‘धार्मिक’ एंगल से जुड़ा हो सकता है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि धार्मिक आड़ में एक विशेष एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, जिसके चलते हिंदू समुदाय से जुड़े कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया।
एटीएस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि कहीं यह पूरा नेटवर्क किसी संगठित विचारधारा आधारित समूह से तो नहीं जुड़ा, जिसमें विदेशी लिंक के जरिए संपर्क और समन्वय स्थापित किया गया हो। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यदि मलेशिया से जुड़ा डिजिटल संपर्क पुष्ट होता है तो यह केस साइबर नेटवर्किंग, विदेशी फंडिंग, या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ जैसी गतिविधियों की ओर भी इशारा कर सकता है।
इस मामले में गठित एसआईटी (SIT) की जांच भी कई अहम बिंदुओं पर केंद्रित है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी के भीतर किस तरह के प्रशिक्षण सत्र, मीटिंग या संवाद आयोजित किए गए, कर्मचारियों पर किस प्रकार का मानसिक दबाव बनाया गया, शिकायतों को दबाने की कोशिश तो नहीं हुई, और एचआर विभाग की भूमिका क्या रही। साथ ही एसआईटी कंपनी के ईमेल सर्वर, इंटरनल कम्युनिकेशन चैनल, व्हाट्सएप/टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग माध्यमों और कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित धार्मिक दबाव के पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
सूत्र बताते हैं कि जांच में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी फोकस बढ़ाया गया है, जिनके विदेशी संपर्क होने की आशंका जताई जा रही है। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस पूरे प्रकरण में कोई ऐसा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं, जो धार्मिक पहचान के आधार पर कर्मचारियों को प्रभावित करने और कंपनी के भीतर वैचारिक नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा हो।
हालांकि इस केस में अभी तक एटीएस की ओर से मलेशिया लिंक या धार्मिक एंगल पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच की दिशा यह संकेत दे रही है कि एजेंसियां अब इसे ‘हाई सेंसिटिव’ मामले के रूप में देख रही हैं। इस बीच हिंदू संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों ने भी मांग की है कि यदि हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने के आरोप सही हैं, तो इसे सामान्य उत्पीड़न नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा गंभीर विषय मानकर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल एटीएस और एसआईटी दोनों ही एजेंसियां डिजिटल सबूतों की सत्यता, विदेशी कनेक्शन की पुष्टि और आरोपों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका तय करने में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच के दौरान इस मामले में और नए तथ्य सामने आ सकते हैं, क्योंकि अब यह प्रकरण केवल कॉर्पोरेट विवाद नहीं, बल्कि साइबर और वैचारिक नेटवर्क के संभावित गठजोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
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