लखनऊ/अम्बेडकरनगर। सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के बीच प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष पर तीखे हमले करने वाले राजभर ने इस मुद्दे पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि बहन-बेटियां किसी भी परिवार, किसी भी दल या किसी भी विचारधारा से जुड़ी हों, उनका सम्मान होना ही चाहिए। जिन्होंने मर्यादा की सीमा लांघी है, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।
राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक विमर्श लगातार व्यक्तिगत हमलों और परिवारों को निशाना बनाने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन बेटियों और महिलाओं को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता। दरअसल, सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की बेटी को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां वायरल हुई थीं। इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने साफ कहा कि जिसने भी ऐसी टिप्पणी की है, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जा सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक परिवार या एक दल का मामला नहीं है। सवाल यह है कि क्या राजनीति इतनी नीचे चली जाएगी कि नेताओं के परिवारों और उनकी बेटियों को भी निशाना बनाया जाने लगे। यदि किसी दल की बेटी के सम्मान की बात उठती है तो उसी संवेदनशीलता के साथ समाज की हर बेटी के सम्मान की भी रक्षा होनी चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सभी राजनीतिक दल दोहरे मानदंड छोड़कर स्पष्ट संदेश दें कि नारी सम्मान किसी पार्टी, जाति या परिवार का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की मर्यादा का प्रश्न है। राजनीतिक लड़ाई विचारों और नीतियों पर हो सकती है, लेकिन बेटियों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक संस्कृति को कमजोर करने वाला कृत्य है। राजभर के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राजनीति में असहमति और आलोचना की सीमा क्या होनी चाहिए। लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन मर्यादा उससे भी अधिक जरूरी है।










