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सावन में क्या करें और क्या नहीं?

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सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालु, धर्मशास्त्रों के अनुसार श्रावण मास के नियम

धर्मशास्त्रों की कसौटी पर श्रावण मास का संपूर्ण मार्गदर्शन

श्रावण (सावन) मास सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र काल माना गया है। धर्मशास्त्रों में इसे केवल व्रत और पूजा का महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, तप, जप, दान, सदाचार और आध्यात्मिक साधना का पर्व बताया गया है। शिव पुराण, स्कंद पुराण, लिंग पुराण, पद्म पुराण तथा वैदिक परंपरा में श्रावण मास के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है।

पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए हलाहल विष का पान किया, तब देवताओं ने उनके ताप को शांत करने के लिए निरंतर जलाभिषेक किया। इसी घटना के प्रतीक रूप में श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा विकसित हुई।

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धर्मशास्त्र स्पष्ट करते हैं कि श्रावण का वास्तविक अर्थ केवल मंदिर जाना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि प्राप्त करना है।

धर्मशास्त्र बताते हैं कि भगवान शिव भाव के भूखे हैं, वैभव के नहीं। यदि व्यक्ति केवल जल चढ़ाए, लेकिन उसके जीवन में सत्य, दया, सेवा, संयम और सदाचार न हो, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। वहीं सच्ची श्रद्धा, निष्काम भक्ति और सात्विक आचरण से किया गया छोटा-सा पूजन भी भगवान शिव को प्रिय होता है।

शिव पुराण का संदेश है कि शिवभक्ति का सर्वोच्च स्वरूप अहंकार का त्याग, आत्मशुद्धि और लोककल्याण की भावना है। इसलिए श्रावण मास केवल अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। धर्मशास्त्रों के अनुसार सावन का सार एक ही है—शिव की उपासना के साथ स्वयं का परिष्कार। जलाभिषेक, मंत्रजप, व्रत, दान, सेवा और सात्विक जीवन जहां श्रावण मास के प्रमुख कर्तव्य हैं, वहीं नशा, हिंसा, असत्य, क्रोध, तामसिक आहार और दुराचार से दूर रहना इस पवित्र मास का मूल संदेश है। यही आचरण भगवान शिव की सच्ची आराधना माना गया है।

सावन में क्या करना चाहिए?

1. शिवलिंग का जलाभिषेक करें

शिव पुराण में श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। सामर्थ्य अनुसार जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घृत और शक्कर से अभिषेक किया जा सकता है। बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प, शमी पत्र और सफेद पुष्प भगवान शिव को प्रिय माने गए हैं।

2. पंचाक्षरी मंत्र का जप करें

“ॐ नमः शिवाय” शिव का पंचाक्षरी महामंत्र है। शिव पुराण के अनुसार इसका नियमित जप पापों का क्षय, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का साधन माना गया है।

3. महामृत्युंजय मंत्र का पाठ

यजुर्वेद में वर्णित महामृत्युंजय मंत्र दीर्घायु, आरोग्य और भय निवारण का मंत्र माना गया है। श्रावण मास में इसका जप विशेष फलदायी बताया गया है।

4. सोमवार व्रत रखें

श्रावण सोमवार का व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। स्कंद पुराण में सोमवार व्रत का विशेष माहात्म्य वर्णित है।

5. रुद्राभिषेक कराएं

यजुर्वेद के श्रीरुद्रम का पाठ करते हुए रुद्राभिषेक कराने से शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। अनेक आचार्य इसे श्रावण का सर्वोत्तम अनुष्ठान मानते हैं।

6. दान और सेवा करें

धर्मशास्त्रों में अन्नदान, जलदान, वस्त्रदान, गौसेवा, ब्राह्मण सेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता को श्रेष्ठ पुण्य बताया गया है। कांवड़ यात्रियों की सेवा भी पुण्यदायी मानी जाती है।

7. सात्विक जीवन अपनाएं

प्रातः स्नान, संध्या-वंदन, संयम, ब्रह्मचर्य (यथाशक्ति), सत्यवादिता, क्रोध पर नियंत्रण तथा नियमित पूजा श्रावण मास के प्रमुख आचरण बताए गए हैं।

सावन में क्या नहीं करना चाहिए?

1. मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें

धर्मशास्त्रों में व्रत और देवपूजन के समय मांस, मछली, अंडा, मदिरा तथा अन्य तामसिक पदार्थों के त्याग का निर्देश मिलता है। सात्विक भोजन को मन और शरीर दोनों के लिए शुद्ध माना गया है।

2. नशा न करें

शराब, तंबाकू, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थ मन को चंचल और अशुद्ध बनाते हैं। श्रावण मास संयम और आत्मनियंत्रण का समय है।

3. असत्य, छल और कटु वचन से बचें

मनुस्मृति और अन्य धर्मग्रंथ सत्य, मधुर वाणी और सदाचार को धर्म का आधार बताते हैं। झूठ, अपमान, चुगली और विवाद से दूर रहने का उपदेश दिया गया है।

4. हिंसा और क्रूरता से बचें

धर्मशास्त्रों में सभी प्राणियों के प्रति दया और करुणा को श्रेष्ठ धर्म कहा गया है। अनावश्यक हिंसा से बचना चाहिए।

5. क्रोध, लोभ और अहंकार त्यागें

भगवान शिव स्वयं वैराग्य और क्षमा के प्रतीक हैं। इसलिए श्रावण मास में काम, क्रोध, लोभ और अहंकार पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

6. शिव पूजा में निषिद्ध सामग्री न चढ़ाएं

धर्मशास्त्रीय परंपरा के अनुसार भगवान शिव को केतकी (केवड़ा) का पुष्प नहीं चढ़ाया जाता। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी गई है, इसलिए सामान्यतः शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती।

7. बेलपत्र अर्पित करते समय सावधानी रखें

बेलपत्र तीन दल वाला, स्वच्छ और बिना कीड़े लगा होना चाहिए। इसे श्रद्धा से अर्पित करना चाहिए।

किन मान्यताओं का शास्त्रों में स्पष्ट आधार नहीं मिलता?

समय के साथ कई लोक परंपराएं भी सावन से जुड़ गई हैं। जैसे—

  • सावन में बाल या दाढ़ी बिल्कुल नहीं कटवानी चाहिए।
  • नाखून काटना पूरी तरह वर्जित है।
  • बैंगन, हरी सब्जियां या कुछ विशेष खाद्य पदार्थ खाना शास्त्र-विरुद्ध है।

प्रमुख धर्मशास्त्रों में इन बातों का स्पष्ट और सार्वभौमिक निर्देश नहीं मिलता। ये मान्यताएं विभिन्न क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों की परंपराओं का हिस्सा हो सकती हैं। इसलिए इन्हें सनातन धर्म का अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं कहा जा सकता।

लेख का शास्त्रीय आधार

  • ऋग्वेद – रुद्र सूक्त (रुद्र की स्तुति)
  • यजुर्वेद – श्रीरुद्रम एवं महामृत्युंजय मंत्र
  • शिव पुराण – शिव पूजा, अभिषेक एवं पंचाक्षरी मंत्र का महत्व
  • स्कंद पुराण – श्रावण मास माहात्म्य
  • लिंग पुराण – शिव उपासना एवं व्रत
  • पद्म पुराण – दान, व्रत और सात्विक जीवन
  • मनुस्मृति – सत्य, संयम और सदाचार के सिद्धांत
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