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TCS के डेटा अलर्ट के पीछे कौन?

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पासवर्ड स्प्रे तकनीक में कई अकाउंट पर सीमित आम पासवर्ड आजमाने की कोशिश की जाती है।

 4 साल पुरानी कर्मचारी जानकारी, पासवर्ड स्प्रे और MFA फटीग ने बढ़ाया रहस्य

नई दिल्ली। देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के सामने आया साइबर अलर्ट पहली नजर में भले ही सीमित डेटा से जुड़ा मामला दिखाई दे, लेकिन इसके पीछे इस्तेमाल की गई कथित तकनीकों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला करीब चार साल पुरानी कर्मचारी जानकारी का है, हमलावर ने पासवर्ड स्प्रे और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी एमएफए फटीग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का दावा किया है और कंपनी फिलहाल पूरे मामले की समीक्षा कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ पुरानी कर्मचारी जानकारी तक सीमित साइबर कोशिश थी या किसी बड़े हमले की शुरुआती कड़ी?

चार साल पुराना डेटा अचानक क्यों बना निशाना?

टीसीएस के मुताबिक उसे कुछ कर्मचारी सूचनाओं के संभावित खुलासे को लेकर साइबर खतरे की चेतावनी मिली है। कंपनी ने कहा है कि संबंधित जानकारी चार साल से ज्यादा पुरानी प्रतीत होती है और यह केवल बुनियादी कर्मचारी जानकारी तक सीमित है।

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यहीं से इस मामले की पहली पहेली सामने आती है। अगर जानकारी पुरानी है और संवेदनशील ग्राहक डेटा से जुड़ी नहीं है, तो हमलावरों की इसमें दिलचस्पी क्यों हुई? क्या पुराने कर्मचारी रिकॉर्ड का इस्तेमाल किसी दूसरे चरण के साइबर हमले के लिए किया जा सकता था? फिलहाल इन सवालों का कोई सार्वजनिक और निर्णायक जवाब सामने नहीं आया है।

असली सुराग ‘पासवर्ड स्प्रे’ और ‘MFA फटीग’ में छिपा है?

टीसीएस ने बताया कि हमलावर ने पासवर्ड स्प्रे और एमएफए फटीग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का दावा किया है। दोनों तरीके सीधे किसी सिस्टम को तोड़ने से ज्यादा यूजर की पहचान और लॉगिन प्रक्रिया को निशाना बनाने से जुड़े होते हैं।

पासवर्ड स्प्रे में हमलावर कई खातों पर कुछ आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड आजमाने की कोशिश कर सकता है। वहीं एमएफए फटीग में किसी यूजर के पास बार-बार प्रमाणीकरण अनुरोध भेजकर उसे गलती से या दबाव में किसी एक अनुरोध को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा सकती है।

अगर पुराने कर्मचारी डेटा में उपलब्ध जानकारी ऐसी कोशिशों के लिए उपयोगी हो सकती थी, तो मामला केवल डेटा के संभावित खुलासे तक सीमित न रहकर पहचान आधारित साइबर हमले की दिशा में भी देखा जा सकता है। हालांकि टीसीएस ने ऐसा कोई निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है।

टीसीएस ने ग्राहक डेटा को लेकर क्या कहा?

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि उसे कस्टमर डेटा, कस्टमर सिस्टम या अपने ऑपरेशनल सिस्टम पर किसी प्रभाव का कोई संकेत नहीं मिला है।

कंपनी ने यह भी कहा है कि उसके सुरक्षा नियंत्रण प्रभावी हैं और वह मामले की निगरानी कर रही है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे बड़े पैमाने पर ग्राहक डेटा चोरी की घटना कहना जल्दबाजी होगी।

लेकिन साइबर सुरक्षा में खतरा केवल उस डेटा से तय नहीं होता जो तत्काल चोरी हुआ दिखाई दे। किसी पुराने कर्मचारी रिकॉर्ड तक पहुंच भी आगे चलकर सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग या पहचान संबंधी हमलों के लिए उपयोगी हो सकती है। यही वजह है कि ऐसे अलर्ट को हल्के में नहीं लिया जाता।

दो साल से सुरक्षा उपाय मजबूत होने का दावा

टीसीएस ने कहा है कि पासवर्ड स्प्रे और एमएफए फटीग जैसे हमलों से निपटने के लिए उसके पास पिछले दो वर्षों से मजबूत सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। कंपनी के अनुसार मौजूदा समीक्षा में उसके सुरक्षा नियंत्रण प्रभावी बने हुए हैं।

इस बयान का अर्थ यह है कि कंपनी फिलहाल अपने सिस्टम में किसी बड़े स्तर के सुरक्षा नियंत्रण विफल होने की पुष्टि नहीं कर रही है। लेकिन जांच पूरी होने तक यह सवाल खुला रहेगा कि हमलावर ने आखिर किस स्तर तक पहुंच बनाने की कोशिश की और उसे कर्मचारी संबंधी पुरानी जानकारी से क्या हासिल हुआ।

क्या यह डेटा चोरी है या सिर्फ साइबर हमले का प्रयास?

इस मामले में सबसे जरूरी अंतर समझना होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर टीसीएस ने कर्मचारी जानकारी के संभावित खुलासे को लेकर अलर्ट मिलने की बात कही है। इसे सीधे तौर पर बड़े पैमाने की डेटा चोरी घोषित करना अभी उचित नहीं होगा।

दूसरी ओर, हमलावर द्वारा बताई गई तकनीकों के दावे को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि अगर किसी हमलावर का लक्ष्य किसी कर्मचारी के अकाउंट तक पहुंच बनाना हो, तो पुराने कर्मचारी रिकॉर्ड उसकी तैयारी का हिस्सा हो सकते हैं।

यानी फिलहाल कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही है—डेटा कितना गया, इससे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि हमलावर वास्तव में चाहता क्या था?

जांच से खुलेंगे इस साइबर पहेली के अगले पन्ने

टीसीएस ने कहा है कि वह मामले की समीक्षा कर रही है और नई जानकारी सामने आने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल कंपनी की ओर से ग्राहक डेटा या उसके ऑपरेशनल सिस्टम पर किसी प्रभाव की पुष्टि नहीं की गई है।

इसलिए इस मामले को लेकर दो बातें अलग-अलग रखना जरूरी है। पहली, टीसीएस को कर्मचारी डेटा के संभावित खुलासे को लेकर साइबर अलर्ट मिला है। दूसरी, अभी तक उपलब्ध कंपनी के बयान में ग्राहक डेटा या ऑपरेशनल सिस्टम से समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

फिर भी चार साल पुरानी कर्मचारी जानकारी, पासवर्ड स्प्रे और एमएफए फटीग का एक साथ सामने आना इस घटना को सामान्य डेटा अलर्ट से ज्यादा दिलचस्प बनाता है। जांच का असली सवाल यही होगा कि क्या हमलावर सिर्फ पुराने रिकॉर्ड तक पहुंच चाहता था या उसके पीछे किसी बड़े साइबर ऑपरेशन की तैयारी थी।

फिलहाल रहस्य बरकरार है। और साइबर दुनिया में कई बार सबसे महत्वपूर्ण सुराग वही होता है, जो पहली नजर में सबसे मामूली दिखाई देता है।

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