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छोटे कारोबारों पर साइबर हमलों में 52% का उछाल

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छह महीने में 4.52 लाख बैकडोर हमले; रोजाना 20,650 बार सेंधमारी की कोशिश

नई दिल्ली। भारत में छोटे और मध्यम कारोबारों पर साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच देश के छोटे और मध्यम कारोबारों के कंप्यूटरों पर 4.52 लाख बैकडोर हमले दर्ज किए गए। यह संख्या पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 52 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान साइबर हमलों की कुल कोशिशें 37.38 लाख तक पहुंच गईं। यानी औसतन हर दिन करीब 20,650 बार कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की गई।

साइबर हमलों में बढ़ोतरी से कारोबारियों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों, ग्राहकों की निजी जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड और ऑनलाइन सेवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर अपराधी कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश हासिल कर डेटा चुराने, जरूरी फाइलों तक पहुंचने और नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की कोशिश कर सकते हैं।

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क्या होता है बैकडोर हमला?

बैकडोर कंप्यूटर या नेटवर्क में प्रवेश का ऐसा रास्ता होता है, जिसके जरिये सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच हासिल की जा सकती है। साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी चुराने, कंप्यूटर पर नियंत्रण हासिल करने या दूसरे नुकसानदेह प्रोग्राम चलाने के लिए कर सकते हैं।

छोटे कारोबार अक्सर सीमित बजट और कम संसाधनों के कारण साइबर सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाते। कई बार पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड और असुरक्षित रिमोट एक्सेस जैसी खामियां अपराधियों के लिए रास्ता खोल देती हैं। एक बार सिस्टम में प्रवेश मिलने के बाद कारोबार के संचालन और ग्राहकों के डेटा को नुकसान पहुंच सकता है।

18 देशों के सर्वे में सामने आए गंभीर आंकड़े

कैस्परस्की के अनुसार, 18 देशों में किए गए सर्वेक्षण में 86 प्रतिशत कारोबार संचालकों ने बताया कि उन्हें पिछले एक साल के दौरान कम से कम एक साइबर हमले का सामना करना पड़ा। सर्वे में शामिल 22 प्रतिशत कारोबारों ने साइबर हमलों के कारण आर्थिक नुकसान होने की जानकारी दी।

करीब पांच में से एक कारोबार ने ग्राहकों की जानकारी चोरी होने या वेबसाइट और ऑनलाइन स्टोर बंद होने की बात कही। वहीं, 16 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनका कुछ डेटा हमेशा के लिए खो गया। लगभग 13 प्रतिशत कारोबारों को अपनी संपत्तियों को ऐसा नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकी।

ये आंकड़े बताते हैं कि साइबर हमलों का असर केवल कंप्यूटर या वेबसाइट तक सीमित नहीं रहता। इससे कारोबार की आय, ग्राहकों का भरोसा और लंबे समय से जुटाई गई डिजिटल जानकारी भी प्रभावित हो सकती है।

कंप्यूटर और कारोबारी डेटा को सुरक्षित रखने के तरीके

रिमोट एक्सेस पर रखें नियंत्रण: कंप्यूटर को दूर से संचालित करने की सुविधा तभी चालू रखें, जब इसकी वास्तविक जरूरत हो। रिमोट एक्सेस को सीधे इंटरनेट पर खुला छोड़ने से बचें। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित वीपीएन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और सीमित उपयोगकर्ता अनुमतियों का इस्तेमाल करें।

सॉफ्टवेयर समय पर अपडेट करें: कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर, कारोबारी सॉफ्टवेयर और सुरक्षा प्रोग्राम को नियमित रूप से अपडेट करें। अपडेट में कई बार उन खामियों को ठीक किया जाता है, जिनका फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं।

मजबूत पासवर्ड और अतिरिक्त सुरक्षा अपनाएं: हर खाते के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें। जहां संभव हो, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें, ताकि केवल पासवर्ड जानने वाला व्यक्ति खाते में प्रवेश न कर सके।

डेटा का बैकअप बनाएं: कारोबारी दस्तावेजों, ग्राहकों के रिकॉर्ड और जरूरी फाइलों का नियमित बैकअप रखें। बैकअप की एक प्रति मुख्य कंप्यूटर और नेटवर्क से अलग सुरक्षित स्थान पर रखना उपयोगी है। समय-समय पर यह भी जांचें कि बैकअप से डेटा दोबारा प्राप्त किया जा सकता है या नहीं।

संदिग्ध लिंक और अटैचमेंट से बचें: ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया पर आए अनजान लिंक और फाइलों को बिना जांचे न खोलें। बैंक, भुगतान सेवा या किसी कारोबारी साझेदार के नाम से आए संदिग्ध संदेशों की पुष्टि संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से करें।

कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दें: कर्मचारियों को फिशिंग, फर्जी भुगतान अनुरोध, पासवर्ड चोरी और संदिग्ध सॉफ्टवेयर की पहचान करने का प्रशिक्षण दें। कारोबार के प्रत्येक कर्मचारी को केवल उतनी ही सिस्टम अनुमति दें, जितनी उसके काम के लिए जरूरी है।

छोटे कारोबारों के लिए क्यों जरूरी है सतर्कता?

छोटे कारोबारों के पास बड़े संस्थानों की तरह अलग साइबर सुरक्षा टीम और व्यापक तकनीकी संसाधन नहीं होते। ऐसे में एक सफल साइबर हमला भी उनके कामकाज को कई दिनों तक बाधित कर सकता है। डेटा चोरी होने पर ग्राहकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है, जबकि वेबसाइट या ऑनलाइन स्टोर बंद होने से बिक्री प्रभावित हो सकती है।

इसलिए कारोबारियों के लिए केवल एंटीवायरस इंस्टॉल करना पर्याप्त नहीं है। नियमित अपडेट, सुरक्षित नेटवर्क, मजबूत पासवर्ड, सीमित एक्सेस और डेटा बैकअप को अपनी रोजमर्रा की कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना जरूरी है।

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