पुराणों में वर्णित रहस्यमयी कथा
हिंदू धर्मग्रंथों में यदुवंश के विनाश की कथा सबसे मार्मिक और रहस्यमयी घटनाओं में गिनी जाती है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि पृथ्वी पर उनके अवतार का उद्देश्य पूर्ण होने के बाद यदुवंश का अंत भी निश्चित है। इस विनाश की पृष्ठभूमि में गांधारी का श्राप, ऋषियों का क्रोध और श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब की एक शरारत प्रमुख कारणों के रूप में वर्णित की जाती है।
साम्ब कौन थे?
साम्ब भगवान श्रीकृष्ण और उनकी दूसरी पत्नी जाम्बवती के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका विवाह कौरव राजकुमार दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से हुआ था। साम्ब अपने साहसी लेकिन चंचल स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे।
गांधारी का श्राप
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद गांधारी ने अपने सौ पुत्रों की मृत्यु का दोष श्रीकृष्ण को देते हुए कहा कि जैसे कौरव वंश का विनाश हुआ है, वैसे ही एक दिन यदुवंश भी समाप्त होगा। श्रीकृष्ण ने इस श्राप को शांत भाव से स्वीकार कर लिया, क्योंकि वे जानते थे कि समय आने पर यही होना है।
ऋषियों से किया गया परिहास
महाभारत युद्ध के लगभग 36 वर्ष बाद महर्षि दुर्वासा सहित अनेक ऋषि द्वारका आए। साम्ब और उनके मित्रों ने मजाक करने की योजना बनाई। उन्होंने साम्ब को स्त्री के वेश में सजाकर ऋषियों के सामने प्रस्तुत किया और पूछा कि यह गर्भवती स्त्री पुत्र को जन्म देगी या पुत्री को।
महर्षि दुर्वासा इस परिहास से अत्यंत क्रोधित हो गए और श्राप दिया—
“इसके गर्भ से लोहे का एक मूसल उत्पन्न होगा और वही पूरे यदुवंश के विनाश का कारण बनेगा।”
श्राप का प्रभाव
कुछ ही समय बाद साम्ब के उदर से वास्तव में लोहे का एक मूसल प्रकट हुआ। यह देखकर सभी भयभीत हो गए और उसे श्रीकृष्ण के पास ले गए।
राजा उग्रसेन के आदेश पर मूसल को पीसकर उसका चूर्ण समुद्र तट पर फिंकवा दिया गया। लेकिन नियति को कुछ और ही स्वीकार था। उसी चूर्ण से समुद्र किनारे एरक (सरकंडे जैसी) घास उग आई।
प्रभास तीर्थ में शुरू हुआ विनाश
समय बीतने के बाद प्रभास तीर्थ में यादवों का विशाल उत्सव आयोजित हुआ। वहां मदिरापान के बाद सात्यिकी और कृतवर्मा के बीच महाभारत युद्ध की पुरानी घटनाओं को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।
विवाद इतना बढ़ा कि सात्यिकी ने क्रोध में कृतवर्मा का वध कर दिया। इसके बाद समस्त यादव दो गुटों में बंट गए और भीषण संघर्ष शुरू हो गया।
घास बनी मौत का हथियार
युद्ध के समय किसी के पास अस्त्र-शस्त्र नहीं थे। ऐसे में सभी ने समुद्र तट पर उगी उसी घास को उखाड़कर एक-दूसरे पर प्रहार करना शुरू कर दिया। ऋषियों के श्राप के प्रभाव से वह घास लोहे के मूसल के समान कठोर हो गई और यादव एक-दूसरे का संहार करने लगे।
श्रीकृष्ण और बलराम ने भी समझ लिया कि नियति अपना कार्य कर रही है। अंततः पूरा यदुवंश नष्ट हो गया।
बलराम और श्रीकृष्ण का पृथ्वी से प्रस्थान
यदुवंश के विनाश के बाद बलराम ने योगबल से देह त्याग दी। वहीं श्रीकृष्ण वन में एक वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे, तभी जरा नामक शिकारी ने उनके चरण को हिरण समझकर बाण चला दिया। भगवान ने उसी घटना को अपने अवतार की पूर्णाहुति का माध्यम बनाया और अपने दिव्य धाम लौट गए।
क्या केवल साम्ब ही थे विनाश के कारण?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार साम्ब की शरारत केवल एक निमित्त बनी। यदुवंश का अंत गांधारी के श्राप, ऋषियों के वचन और भगवान श्रीकृष्ण की पूर्वनियोजित लीला का परिणाम था। इसलिए केवल साम्ब को यदुवंश के विनाश का दोषी मानना धार्मिक दृष्टि से पूर्ण सत्य नहीं माना जाता।










