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पप्पू यादव की आपराधिक पृष्ठभूमि: 41 मामले, हत्या के प्रयास और रंगदारी तक

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पप्पू यादव की सियासी छवि पर गंभीर सवाल

पूर्णिया के सांसद के चुनावी हलफनामे में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले, दो मामलों में दोषसिद्धि भी; 1995 के पुराने मामले में फरवरी 2026 में हुई थी गिरफ्तारी

बिहार की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी और आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की आपराधिक पृष्ठभूमि एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। उनके 2024 के लोकसभा चुनावी हलफनामे में घोषित 41 आपराधिक मामलों का विवरण कई गंभीर सवाल खड़े करता है। हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, डकैती, आगजनी और दंगा जैसी गंभीर धाराओं के आरोपों का उल्लेख किसी भी जनप्रतिनिधि के सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक जवाबदेही के संदर्भ में अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और मायनेटा पर उपलब्ध चुनावी हलफनामे के मुताबिक, पप्पू यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने खिलाफ 41 आपराधिक मामले घोषित किए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 31 मामले घोषित किए थे। यानी पांच वर्षों के अंतराल में उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी हुई दिखाई देती है।

हत्या के प्रयास, अपहरण और रंगदारी जैसी गंभीर धाराएं

पप्पू यादव के हलफनामे में दर्ज मामलों की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि उनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 307 यानी हत्या के प्रयास के तीन आरोप शामिल हैं। इसके अलावा अपहरण से संबंधित धारा 365 के दो, रंगदारी से संबंधित धारा 386 के दो और धारा 387 का एक मामला दर्ज है।

इतना ही नहीं, धारा 395 के तहत डकैती और धारा 436 के तहत आगजनी से संबंधित आरोप भी हलफनामे में दर्ज हैं। दंगा और बलवा से जुड़ी धाराओं के तहत भी कई आरोपों का उल्लेख है। धारा 147 के तहत 18 और धारा 148 के तहत नौ आरोप दर्ज बताए गए हैं। सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग से जुड़ी धारा 353 के तहत भी 12 आरोपों का उल्लेख है।

ये आंकड़े किसी राजनीतिक विरोधी के बयान नहीं, बल्कि स्वयं उम्मीदवार की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए हलफनामे के आधार पर सार्वजनिक हुए हैं। हालांकि, इन धाराओं के तहत आरोप दर्ज होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। प्रत्येक मामले का अंतिम फैसला अदालत ही करती है।

दो मामलों में दोषसिद्धि, अपील लंबित

मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं है। 2024 के चुनावी हलफनामे में पप्पू यादव ने दो मामलों में दोषसिद्धि का भी उल्लेख किया था।

पहला मामला फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 840/2014 से संबंधित है। इसमें 24 नवंबर 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 414 के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया था। हलफनामे में एक वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दर्ज है।

दूसरा मामला फतुहा थाना कांड संख्या 70/2023 है। इसमें 12 अप्रैल 2023 को धारा 353 और 147 के तहत दोषसिद्धि दर्ज की गई थी। धारा 353 के तहत डेढ़ वर्ष और धारा 147 के तहत छह महीने के कठोर कारावास की सजा का उल्लेख है।

दोनों मामलों में अपील दायर किए जाने और उनके लंबित होने की जानकारी भी हलफनामे में दी गई है। इसलिए इन सजाओं की चर्चा करते समय अपील की न्यायिक स्थिति का उल्लेख आवश्यक है।

1995 का मामला: फरवरी 2026 में हुई गिरफ्तारी

पप्पू यादव की कानूनी मुश्किलें फरवरी 2026 में भी सुर्खियों में रहीं। पटना पुलिस ने उन्हें 1995 के एक पुराने मामले में 7 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, यह मामला गर्दनीबाग थाने में दर्ज था और इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी, घर में अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं शामिल थीं।

पुलिस का कहना था कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं होने के कारण वारंट जारी हुआ था। इस गिरफ्तारी को लेकर पप्पू यादव ने राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया था, जबकि पुलिस ने कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। 13 फरवरी 2026 को पटना की अदालत से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए।

सवाल केवल मुकदमों का नहीं, राजनीतिक जवाबदेही का भी है

लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत आरोप साबित न कर दे। लेकिन जनप्रतिनिधियों के मामले में एक दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष भी है—जनता के सामने अपने कानूनी रिकॉर्ड और उसकी स्थिति को लेकर पारदर्शिता।

पप्पू यादव के मामले में 41 घोषित आपराधिक मामले, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और डकैती जैसी गंभीर धाराओं का उल्लेख तथा दो मामलों में दर्ज दोषसिद्धि ऐसे तथ्य हैं, जिन पर सार्वजनिक चर्चा और जवाबदेही की मांग स्वाभाविक है।

सवाल यह है कि राजनीति में जनसेवा, संघर्ष और जनहित के दावों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के आपराधिक मुकदमों और अदालतों में उनकी स्थिति पर भी उतनी ही गंभीरता से चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए? जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके प्रतिनिधि के खिलाफ कौन-कौन से मामले दर्ज हैं, किन मामलों में अदालत ने फैसला सुनाया है और किन मामलों में अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

नोट: इस खबर में आपराधिक मामलों और दोषसिद्धि का विवरण 2024 के लोकसभा चुनाव में दाखिल पप्पू यादव के चुनावी हलफनामे तथा फरवरी 2026 की प्रकाशित समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। लंबित मामलों में आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। अदालतों के अंतिम निर्णय और अपीलों की अद्यतन स्थिति अलग से सत्यापित की जानी चाहिए।

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