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क्यों है भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना

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हिंदू धर्म में श्रावण मास (सावन) को वर्ष का सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीना माना गया है। धर्म शास्त्रों, पुराणों और वेदों में सावन मास का विशेष महत्व बताया गया है। यह महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन इसके साथ ही माता पार्वती, भगवान विष्णु, भगवान श्रीकृष्ण, नाग देवता, सूर्यदेव और तुलसी माता की पूजा का भी विशेष विधान है।

मान्यता है कि सावन में श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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सावन केवल एक महीना नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति, संयम और आध्यात्मिक साधना का पर्व है। इस पूरे मास में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक सावन में शिव पूजा करता है, उस पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सावन का धार्मिक महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।

मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

सावन में किस देवता की पूजा करनी चाहिए?

  • भगवान शिव
  • माता पार्वती
  • भगवान गणेश
  • भगवान विष्णु
  • भगवान श्रीकृष्ण
  • नाग देवता
  • सूर्यदेव
  • तुलसी माता

हालांकि पूरे महीने में भगवान शिव की आराधना सर्वोपरि मानी गई है।

भगवान शिव की पूजा कैसे करें?

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें तथा शिव चालीसा और शिव पुराण का पाठ करें।

सावन सोमवार व्रत का महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है।

  • अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
  • विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
  • दांपत्य जीवन सुखमय होता है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • रोग, कष्ट और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

सावन में पूजा करने से क्या फल मिलता है?

धर्म शास्त्रों के अनुसार सावन में पूजा करने से—

  • भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का नाश होता है।
  • अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
  • ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • धन, वैभव और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • संतान सुख मिलता है।
  • विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • मन को शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

सावन में क्या करें?

  • प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • शिव पुराण और रुद्राष्टक का पाठ करें।
  • दान-पुण्य करें।
  • गौ सेवा करें।
  • जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
  • सात्विक भोजन करें।
  • क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

सावन में क्या नहीं करना चाहिए?

  • मांस और मदिरा का सेवन न करें।
  • तामसिक भोजन से बचें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • झूठ, छल और क्रोध से दूर रहें।
  • पेड़-पौधों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचाएं।

सावन और प्रकृति का संबंध

सावन वर्षा ऋतु का प्रमुख महीना है। इस समय प्रकृति हरियाली से आच्छादित रहती है। भारतीय संस्कृति में सावन को केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।

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