या है सिर्फ आधा सच? जानिए वैज्ञानिक शोध क्या कहता है
आजकल सोशल मीडिया और स्वास्थ्य से जुड़े प्लेटफॉर्म पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि 72 घंटे का उपवास (Fasting) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को पूरी तरह “रीसेट” कर देता है। यह दावा सुनने में जितना आकर्षक लगता है, उतना ही जरूरी है इसके पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को समझना।
क्या कहता है वैज्ञानिक शोध?
अमेरिका के University of Southern California के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक भोजन न करने पर शरीर पहले ग्लूकोज़ और फिर वसा के भंडार का उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है। इस दौरान शरीर पुरानी, क्षतिग्रस्त और कम प्रभावी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह शरीर की प्राकृतिक सफाई (Natural Cleanup) का हिस्सा हो सकता है।
उपवास के बाद कैसे बनती हैं नई इम्यून कोशिकाएं?
अध्ययन के अनुसार, जब 72 घंटे या उससे अधिक समय के उपवास के बाद दोबारा भोजन शुरू किया जाता है, तो शरीर में मौजूद स्टेम सेल सक्रिय होने लगती हैं। ये नई श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) का निर्माण करती हैं, जो शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
यानी उपवास के बाद प्रतिरक्षा तंत्र के कुछ हिस्सों के पुनर्निर्माण की संभावना देखी गई है।
Valter Longo ने क्या बताया?
इस अध्ययन का नेतृत्व प्रसिद्ध दीर्घायु (Longevity) शोधकर्ता Valter Longo ने किया। उनके अनुसार उपवास के दौरान PKA नामक जीन की गतिविधि कम हो जाती है। यही बदलाव स्टेम सेल को पुनर्जनन (Regeneration) की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत देता है, जिससे नई और स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं का निर्माण संभव हो सकता है।
किन लोगों पर हुआ अध्ययन?
यह शोध चूहों के अलावा कुछ मानव प्रतिभागियों, खासकर कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों, पर भी किया गया। इनमें उपवास के बाद प्रतिरक्षा स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिले।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह शोध शुरुआती चरण में है और इसे सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
क्या 72 घंटे का उपवास सभी के लिए सुरक्षित है?
बिल्कुल नहीं। लंबे समय तक उपवास हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता।
विशेष रूप से इन लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसा उपवास नहीं करना चाहिए—
मधुमेह (Diabetes) के मरीज
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग
कुपोषित व्यक्ति
नियमित दवाइयां लेने वाले मरीज
बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग
क्या इम्यून सिस्टम वास्तव में ‘रीसेट’ हो जाता है?









