ट्रंप की धमकी पर भड़के गालिबाफ; बोले- शब्दों का चयन सावधानी से करें
बर्गनस्टॉक/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव एक बार फिर सतह पर आता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नई चेतावनी के बाद ईरानी संसद अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान किसी भी प्रकार की धमकियों से प्रभावित होने वाला नहीं है और उसकी सशस्त्र सेनाएं हर स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोई देश ईरान को डराने की कोशिश करेगा तो उसे इसका जवाब मिलेगा। उनके अनुसार, अमेरिका की दबाव और धमकी की नीति पहले भी असफल रही है और भविष्य में भी उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्विट्जरलैंड के Bürgenstock में पश्चिम एशिया संकट को समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू हुई वार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि तेहरान को लेबनान में अपने सहयोगी संगठन Hezbollah की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा और इस्राइल के खिलाफ हमले रुकने चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर पहले से भी अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप के इस बयान के बाद वार्ता का माहौल तनावपूर्ण हो गया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सत्र में शामिल होने से इनकार कर दिया। ईरानी अधिकारियों का कहना था कि वे किसी ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगे जिसे वे अमेरिकी मीडिया प्रदर्शन मानते हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक मुलाकात, हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर की योजना बनाई गई थी। हालांकि गालिबाफ और विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद पहले दिन की वार्ता भी बाधित हो गई और दोनों पक्षों ने आंतरिक परामर्श के लिए बातचीत स्थगित कर दी। सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने संबंधी मसौदे पर सहमति बनी है। इसके अलावा दुनिया भर के बैंकों में फंसी ईरान की संपत्तियों को मुक्त कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ईरान लंबे समय से अपनी जमी हुई विदेशी परिसंपत्तियों की वापसी की मांग करता रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग छह अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जारी करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। हालांकि ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य की वार्ताओं की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनान में इस्राइली सैन्य कार्रवाई रुकती है या नहीं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिया है कि यदि हिज्बुल्ला के खिलाफ इस्राइल की कार्रवाई जारी रहती है तो तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में आगे बढ़ने से इनकार कर सकता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है और अमेरिका-ईरान संबंधों में फिर से टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
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