गन्ना मूल्य ₹500 प्रति कुंतल घोषित करे सरकार
भाकियू अराजनैतिक ने उठाए फसल नुकसान, धान खरीद और जलनिकासी के मुद्दे; मुख्यमंत्री से किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग
लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने प्रदेश सरकार से आगामी पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की मांग की है। संगठन ने किसानों की आर्थिक स्थिति, बढ़ती उत्पादन लागत और बारिश से बर्बाद हुई फसलों का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। इसी क्रम में तीन नवंबर को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
गन्ना मूल्य निर्धारण में किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप
भाकियू अराजनैतिक के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी किसानों की आर्थिक स्थिति और गन्ने की उत्पादन लागत को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार करने के बजाय चीनी मिलों के पक्ष में रिपोर्ट भेज रहे हैं। इससे गन्ना किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली की समीक्षा कराने और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग की।
संगठन का कहना है कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले मूल्य घोषित होने से किसानों को आर्थिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। बढ़ती लागत के बीच उचित मूल्य मिलना किसानों के लिए जरूरी है।
बारिश और जलभराव से फसलों को नुकसान
किसान संगठन ने अत्यधिक वर्षा और जलभराव से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, हरदोई और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में जलभराव के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।
चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि नालों और जलनिकासी व्यवस्था की समय पर सफाई नहीं होने से खेतों में पानी भरने की समस्या गंभीर हुई। संगठन ने जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने, प्रभावित किसानों को राहत देने और फसल नुकसान का उचित आकलन कराकर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
धान खरीद केंद्रों पर व्यवस्था सुधारने की मांग
भाकियू अराजनैतिक ने धान खरीद केंद्रों पर खरीद व्यवस्था सुचारू कराने पर भी जोर दिया है। संगठन का कहना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए और सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचना चाहिए।
इसके अलावा बैंक, बीमा कंपनियों और किसानों से जुड़े अन्य मामलों की जांच कराकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई है। संगठन ने गन्ना आवंटन, भुगतान और किसानों से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की है।
अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली से प्रदेश सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों के हितों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने कुछ किसान नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि किसान हितों की आड़ में कुछ लोग वास्तविक मुद्दों को कमजोर कर रहे हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।
भाकियू अराजनैतिक के अनुसार, तीन नवंबर को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन कर गन्ना मूल्य, फसल नुकसान, धान खरीद और किसानों की अन्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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